शहडोल। जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलटिकुरी सचिव के स्थानांतरण के बाद भी पुरानी ग्राम पंचायत के खातों से लाखों रुपये के ई-पेमेंट जारी होने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी होने और निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी सचिव द्वारा पुरानी पंचायत से भुगतान किए गए, जबकि नियमों के अनुसार उन्हें नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण कर लेना चाहिए था।
जानकारी के अनुसार 15 जून 2026 को स्थानांतरण आदेश जारी करते हुए संबंधित सचिव को तीन दिवस के भीतर नवीन पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण कर सूचना देने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पुरानी पंचायत के खातों से लाखों रुपये के ऑनलाइन भुगतान होने के रिकॉर्ड सामने आए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 जून को जनपद पंचायत बुढ़ार के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि स्थानांतरण के बाद पुरानी पंचायत के खातों से राशि आहरित करना गंभीर वित्तीय अनियमितता है तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
यदि स्थानांतरण आदेश प्रभावी था तो पुरानी पंचायत से भुगतान किस अधिकार से किए गए?
तीन दिन में कार्यभार ग्रहण कराने के आदेश का पालन क्यों नहीं कराया गया?
डिजिटल हस्ताक्षर एवं वित्तीय प्रभार समय पर नए सचिव को क्यों नहीं सौंपे गए?
भुगतान की अनुमति किस स्तर पर दी गई और इसकी निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी?
यदि यह नियमों का उल्लंघन था तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इसे रोका क्यों नहीं?
निष्पक्ष जांच की मांग
यह मामला केवल स्थानांतरण आदेश की अवहेलना तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा है। यदि स्थानांतरण के बाद भी भुगतान हुए हैं तो इसकी जिम्मेदारी केवल संबंधित सचिव तक सीमित नहीं मानी जा सकती। यह भी जांच का विषय है कि निगरानी तंत्र कहाँ विफल हुआ और किस स्तर पर चूक हुई।
अब आवश्यक है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि भुगतान किन परिस्थितियों में हुए, नियमों का उल्लंघन किसने किया और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, बल्कि पंचायतों में सार्वजनिक धन के उपयोग पर जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
इनका कहना
खबर पर पर संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित कर दी गई है जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्यवाही की जाएगी।
राजीव लघाटे, सीईओ,जनपद पंचायत बुढार
Author: सुभाष गौतम
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