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आस्था बदली, लेकिन आरक्षण नहीं, गोहपारू में धर्म परिवर्तन और सरकारी लाभ को लेकर उठे सवाल

शहडोल। गोहपारू जनपद पंचायत क्षेत्र में धर्म परिवर्तन और आरक्षण लाभ को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कुछ कर्मचारियों ने अपनी धार्मिक आस्था बदल ली है, लेकिन सरकारी अभिलेखों में अब भी पूर्व जातिगत पहचान के आधार पर मिलने वाले लाभों का उपयोग कर रहे हैं। मामले को लेकर सामाजिक संगठनों और नागरिकों के बीच जांच की मांग तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म और पूजा-पद्धति

राजनीति

आस्था बदली, लेकिन आरक्षण नहीं, गोहपारू में धर्म परिवर्तन और सरकारी लाभ को लेकर उठे सवाल

शहडोल। गोहपारू जनपद पंचायत क्षेत्र में धर्म परिवर्तन और आरक्षण लाभ को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कुछ कर्मचारियों ने अपनी धार्मिक आस्था बदल ली है, लेकिन सरकारी अभिलेखों में अब भी पूर्व जातिगत पहचान के आधार पर मिलने वाले लाभों का उपयोग कर रहे हैं। मामले को लेकर सामाजिक संगठनों और नागरिकों के बीच जांच की मांग तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म और पूजा-पद्धति

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दिल्ली

बुढार का असली ‘मालिक’ कौन? कानून के रखवाले लाचार, ‘बड्डे’ का कबाड़ साम्राज्य बरकरार!

शहडोल। एक तरफ पुलिस महकमा है, कानून की बड़ी-बड़ी किताबें हैं, थाना प्रभारी से लेकर एसडीओपी तक की फौज है। दूसरी तरफ क्षेत्र के रसूखदार नाम हैं— फिर भोपाल में बैठी सरकार है, जिसके मुखिया सुशासन का दम भरते नहीं थकते। लेकिन इन सबके बीच एक यक्ष प्रश्न बुढार की फिजाओं में तैर रहा है आखिर बुढार का असली ‘मालिक’ कौन है? क्या कानून का राज धरातल पर है, या फिर तमाम प्रशासनिक सूरमाओं को ठेंगा दिखाते हुए ‘बड्डे’ का कबाड़ सिंडिकेट इस पूरे इलाके को हांक रहा है? थाना-पुलिस