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कई थानों की नाक के नीचे से गुजरते हैं अवैध ट्रक, ‘एंट्री’ के खेल में कौन-कौन साझीदार?

शहडोल। बुढार थाना क्षेत्र से शुरू होने वाला अवैध कबाड़ का यह ‘काला खेल’ सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है। भारी-भरकम ट्रकों और पिकअप वाहनों में लोड होकर जब चोरी का कबाड़ सड़कों पर दौड़ता है, तो वह किसी अदृश्य मार्ग से नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय और राष्ट्रीय राजमार्गों से होकर गुजरता है। हैरान करने वाली बात यह है कि रास्ते में पड़ने वाले आधे दर्जन थानों और पुलिस चौकियों को इस ‘ओवरलोड’ और अवैध खेप की भनक तक नहीं लगती। यह चुप्पी किसी तकनीकी खामी का नतीजा नहीं,

राजनीति

कई थानों की नाक के नीचे से गुजरते हैं अवैध ट्रक, ‘एंट्री’ के खेल में कौन-कौन साझीदार?

शहडोल। बुढार थाना क्षेत्र से शुरू होने वाला अवैध कबाड़ का यह ‘काला खेल’ सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है। भारी-भरकम ट्रकों और पिकअप वाहनों में लोड होकर जब चोरी का कबाड़ सड़कों पर दौड़ता है, तो वह किसी अदृश्य मार्ग से नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय और राष्ट्रीय राजमार्गों से होकर गुजरता है। हैरान करने वाली बात यह है कि रास्ते में पड़ने वाले आधे दर्जन थानों और पुलिस चौकियों को इस ‘ओवरलोड’ और अवैध खेप की भनक तक नहीं लगती। यह चुप्पी किसी तकनीकी खामी का नतीजा नहीं,

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दिल्ली

कबाड़ माफिया का तिलिस्म, आखिर किसका ‘वरदहस्त’ है इस ‘बड्डे’ नेटवर्क पर?

शहडोल। जिले के बुढार थाना क्षेत्र में इन दिनों एक तथाकथित कबाड़ माफिया का साम्राज्य चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा इसलिए नहीं कि उसका कारोबार बड़ा है, बल्कि इसलिए कि उसका ‘नेटवर्क’ और ‘प्रभाव’ पुलिस प्रशासन के इकबाल को चुनौती दे रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि इस माफिया के तार ‘बड्डे -बड्डे‘ रसूखदारों से जुड़े हैं, जिसके चलते कानून के हाथ इसके गिरेबान तक पहुँचने से पहले ही ठिठक जाते हैं। खाकी की चुप्पी और रसूख का ‘कवच’ हैरानी की बात यह है कि