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आबकारी की वर्दी ‘ठेकेदारों’ के दर पर गिरवी, पैकारी का बढ़ा मायाजाल, क्या कलेक्टर और एसपी साधेंगे चुप्पी?

शहडोल। जिले में अवैध शराब का काला कारोबार अब सिर्फ छिपे तौर पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण के खुले खेल में बदल चुका है। आबकारी विभाग की साख और उसकी वर्दी शराब माफियाओं की दुकान के चौखट पर गिरवी नजर आ रही है। गली-मोहल्लों में फल-फूल रहा पैकारी का यह अवैध साम्राज्य अब सीधे तौर पर स्थानीय तंत्र की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक खामोशी पर उठते गंभीर सवाल जिले में हर गांव में शराब की आपूर्ति का जाल बिछ चुका है, लेकिन जिला कलेक्टर और पुलिस

राजनीति

आबकारी की वर्दी ‘ठेकेदारों’ के दर पर गिरवी, पैकारी का बढ़ा मायाजाल, क्या कलेक्टर और एसपी साधेंगे चुप्पी?

शहडोल। जिले में अवैध शराब का काला कारोबार अब सिर्फ छिपे तौर पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण के खुले खेल में बदल चुका है। आबकारी विभाग की साख और उसकी वर्दी शराब माफियाओं की दुकान के चौखट पर गिरवी नजर आ रही है। गली-मोहल्लों में फल-फूल रहा पैकारी का यह अवैध साम्राज्य अब सीधे तौर पर स्थानीय तंत्र की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक खामोशी पर उठते गंभीर सवाल जिले में हर गांव में शराब की आपूर्ति का जाल बिछ चुका है, लेकिन जिला कलेक्टर और पुलिस

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दिल्ली

विश्वविद्यालय में ₹75 करोड़ के फंड पर सवाल, कागजों में 100% खर्च, जमीनी हकीकत कुछ और?

 शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय, शहडोल एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में है। आरोप है कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान और प्रधानमंत्री उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय को प्राप्त लगभग ₹75 करोड़ की राशि के उपयोग को लेकर सरकारी अभिलेखों और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय को RUSA के तहत ₹55 करोड़ तथा PM-USHA योजना के तहत ₹20 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई थी। उपलब्ध दस्तावेजों में RUSA की राशि का 100 प्रतिशत उपयोग दर्शाया गया