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एकतरफा माहौल बनाने वाली योजनाओं के ‘भाग्यविधाता’ दाने-दाने को मोहताज, मैदानी अमले का महीनों से मानदेय अटका

शहडोल। मध्य प्रदेश में जो योजनाएं चुनाव का पासा पलट देती हैं, एकतरफा माहौल बना देती हैं, हारी हुई बाजी जिताकर सत्ता के शीर्ष पर बैठे चेहरे तक बदल देती हैं… आज उन्हीं योजनाओं को जमीन पर उतारने वाला मैदानी अमला खून के आंसू रो रहा है। सूबे की ‘लाडली बहना’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के दम पर सरकारें तो आलीशान कुर्सियों पर काबिज हो गईं, लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर दिन-रात एक करने वाले रोजगार सहायक, उप-यंत्री और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी आज महीनों से अपने जायज पारिश्रमिक के लिए तरस

राजनीति

एकतरफा माहौल बनाने वाली योजनाओं के ‘भाग्यविधाता’ दाने-दाने को मोहताज, मैदानी अमले का महीनों से मानदेय अटका

शहडोल। मध्य प्रदेश में जो योजनाएं चुनाव का पासा पलट देती हैं, एकतरफा माहौल बना देती हैं, हारी हुई बाजी जिताकर सत्ता के शीर्ष पर बैठे चेहरे तक बदल देती हैं… आज उन्हीं योजनाओं को जमीन पर उतारने वाला मैदानी अमला खून के आंसू रो रहा है। सूबे की ‘लाडली बहना’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के दम पर सरकारें तो आलीशान कुर्सियों पर काबिज हो गईं, लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर दिन-रात एक करने वाले रोजगार सहायक, उप-यंत्री और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी आज महीनों से अपने जायज पारिश्रमिक के लिए तरस

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दिल्ली

एकतरफा माहौल बनाने वाली योजनाओं के ‘भाग्यविधाता’ दाने-दाने को मोहताज, मैदानी अमले का महीनों से मानदेय अटका

शहडोल। मध्य प्रदेश में जो योजनाएं चुनाव का पासा पलट देती हैं, एकतरफा माहौल बना देती हैं, हारी हुई बाजी जिताकर सत्ता के शीर्ष पर बैठे चेहरे तक बदल देती हैं… आज उन्हीं योजनाओं को जमीन पर उतारने वाला मैदानी अमला खून के आंसू रो रहा है। सूबे की ‘लाडली बहना’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के दम पर सरकारें तो आलीशान कुर्सियों पर काबिज हो गईं, लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर दिन-रात एक करने वाले रोजगार सहायक, उप-यंत्री और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी आज महीनों से अपने जायज पारिश्रमिक के लिए तरस