
खाकी-खादी की मिलीभगत से फल-फूल रहा अवैध ‘कबाड़ साम्राज्य’, कानून को जेब में रखकर दौड़ रहीं माफिया की गाड़ियाँ
शहडोल। जिले में कानून का राज है या माफिया का? यह सवाल आज हर उस आम नागरिक की जुबान पर है जो दिन-रात सड़कों पर अवैध कबाड़ से लदी गाड़ियों को सरपट दौड़ते देख रहा है। SECL हो या रेलवे का कीमती सामान, कबाड़ माफिया के लिए सब कुछ महज़ ‘मुनाफे का सौदा’ बनकर रह गया है। कानून को जेब में लेकर घूम रहे ‘चोरों के सरताज’ स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह तथाकथित धर्म का प्रचारक असल में अपराध का ऐसा ‘सरताज’ बन बैठा है, जिसके आगे न तो खाकी














