
विदेश भ्रमण पर सांसद, पटरी से उतरी स्थानीय उम्मीदें?
जब इलाका मूलभूत सुविधाओं, जर्जर सड़कों और बेरोजगारी से जूझ रहा हो, तब ‘वैश्विक मंच पर नाम चमकने’ के दावे केवल कागजी गुब्बारे ही नजर आते हैं। शहडोल। सितंबर का महीना कोई ‘क्रांतिकारी’ बदलाव नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं और धरातल की हकीकत का नया नमूना लेकर आ रहा है। एक तरफ सांसद महोदया उज़्बेकिस्तान की सरकारी सैर पर रवाना हो रही हैं, तो दूसरी तरफ जनता उस ट्रेन के ठहराव का जश्न मनाने को मजबूर है, जो सालों पहले उसी से छीन ली गई थी। डिप्लोमेसी या सरकारी खर्च















