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विदेश भ्रमण पर सांसद, पटरी से उतरी स्थानीय उम्मीदें?

 जब इलाका मूलभूत सुविधाओं, जर्जर सड़कों और बेरोजगारी से जूझ रहा हो, तब ‘वैश्विक मंच पर नाम चमकने’ के दावे केवल कागजी गुब्बारे ही नजर आते हैं। शहडोल।  सितंबर का महीना कोई ‘क्रांतिकारी’ बदलाव नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं और धरातल की हकीकत का नया नमूना लेकर आ रहा है। एक तरफ सांसद महोदया उज़्बेकिस्तान की सरकारी सैर पर रवाना हो रही हैं, तो दूसरी तरफ जनता उस ट्रेन के ठहराव का जश्न मनाने को मजबूर है, जो सालों पहले उसी से छीन ली गई थी। डिप्लोमेसी या सरकारी खर्च

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विदेश भ्रमण पर सांसद, पटरी से उतरी स्थानीय उम्मीदें?

 जब इलाका मूलभूत सुविधाओं, जर्जर सड़कों और बेरोजगारी से जूझ रहा हो, तब ‘वैश्विक मंच पर नाम चमकने’ के दावे केवल कागजी गुब्बारे ही नजर आते हैं। शहडोल।  सितंबर का महीना कोई ‘क्रांतिकारी’ बदलाव नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं और धरातल की हकीकत का नया नमूना लेकर आ रहा है। एक तरफ सांसद महोदया उज़्बेकिस्तान की सरकारी सैर पर रवाना हो रही हैं, तो दूसरी तरफ जनता उस ट्रेन के ठहराव का जश्न मनाने को मजबूर है, जो सालों पहले उसी से छीन ली गई थी। डिप्लोमेसी या सरकारी खर्च

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दिल्ली

विश्वविद्यालय में ₹75 करोड़ के फंड पर सवाल, कागजों में 100% खर्च, जमीनी हकीकत कुछ और?

 शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय, शहडोल एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में है। आरोप है कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान और प्रधानमंत्री उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय को प्राप्त लगभग ₹75 करोड़ की राशि के उपयोग को लेकर सरकारी अभिलेखों और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय को RUSA के तहत ₹55 करोड़ तथा PM-USHA योजना के तहत ₹20 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई थी। उपलब्ध दस्तावेजों में RUSA की राशि का 100 प्रतिशत उपयोग दर्शाया गया