
आबकारी की वर्दी ‘ठेकेदारों’ के दर पर गिरवी, पैकारी का बढ़ा मायाजाल, क्या कलेक्टर और एसपी साधेंगे चुप्पी?
शहडोल। जिले में अवैध शराब का काला कारोबार अब सिर्फ छिपे तौर पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण के खुले खेल में बदल चुका है। आबकारी विभाग की साख और उसकी वर्दी शराब माफियाओं की दुकान के चौखट पर गिरवी नजर आ रही है। गली-मोहल्लों में फल-फूल रहा पैकारी का यह अवैध साम्राज्य अब सीधे तौर पर स्थानीय तंत्र की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक खामोशी पर उठते गंभीर सवाल जिले में हर गांव में शराब की आपूर्ति का जाल बिछ चुका है, लेकिन जिला कलेक्टर और पुलिस
















