शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सोशल मीडिया पर लाखों-करोड़ों फॉलोवर्स के दम पर पुलिस विभाग को कथित तौर पर चुनौती देने वाले यातायात प्रधान आरक्षक विवेकानंद पर आखिरकार गाज गिर गई है। पुलिस विभाग द्वारा उन्हें निलंबित किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही थीं। इसी पृष्ठभूमि में अब शहडोल पुलिस प्रशासन ने एक तथ्यात्मक और स्पष्ट आधिकारिक बयान जारी कर इस कार्रवाई की असल वजह जनता के सामने रखी है।
प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि कोई भी शासकीय कर्मचारी नियमों और सिस्टम से ऊपर नहीं हो सकता।
क्या हैं प्रधान आरक्षक विवेकानंद पर गंभीर आरोप?
पुलिस प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, प्रधान आरक्षक विवेकानंद अपनी लोकप्रियता का उपयोग शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन के बजाय अपने निजी और व्यावसायिक लाभ के लिए कर रहे थे।
शासकीय दायित्वों की घोर उपेक्षा
प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की तरह विवेकानंद से भी निर्धारित समय पर आकर 8 घंटे की शासकीय सेवा देने की अपेक्षा थी। लेकिन वे बिना किसी सूचना के ड्यूटी से लगातार गायब रहते थे।
निजी लाभ के लिए समानांतर कमाई का जरिया
उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी फैन फॉलोइंग को कमाई का माध्यम बना लिया था। इसके लिए उन्होंने बकायदा प्राइवेट वीडियोग्राफर और फिल्मांकन के लिए निजी लोगों को काम पर रखा हुआ था, जो ड्यूटी के समय उनके वीडियो शूट करते थे।
विभागीय गोपनीयता को खतरा
यह भी बात सामने आई है कि वे अपने विभागीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की स्क्रीनशॉट, विभागीय और गुप्त बातों को साझा किए, जो कि पुलिस सेवा नियमावली के सख्त खिलाफ है।
सिस्टम को चुनौती
लाखों फॉलोवर्स के दबाव में आकर मध्य प्रदेश पुलिस विभाग की छवि और अनुशासन को दांव पर लगाया जा रहा था।
‘प्रतिभा का स्वागत, लेकिन मनमर्जी नहीं चलेगी’
शहडोल पुलिस ने यह साफ किया है कि किसी पुलिसकर्मी का जनता के बीच लोकप्रिय होना विभाग के लिए गर्व की बात है, लेकिन इस लोकप्रियता की आड़ में शासकीय कर्तव्यों से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। प्रशासन ने विवेकानंद के सामने रचनात्मक विकल्प भी रखे ।
“यदि विवेकानंद सोशल मीडिया के माध्यम से समाज सेवा या जन-जागरूकता फैलाना चाहते हैं, तो उन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यालय के ‘मीडिया सेल’ में पोस्टिंग ले लेनी चाहिए। यदि वे बड़े स्तर पर सक्रिय होना चाहते हैं, तो वे भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय के ‘सोशल मीडिया सेल’ में अपनी सेवाएं देने के लिए सहमति दे सकते हैं। इससे उनकी प्रतिभा का लाभ मध्य प्रदेश शासन की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में मिल सकेगा।”
प्रशंसकों से अपील और विभाग का सख्त संदेश
पुलिस प्रशासन ने विवेकानंद के तमाम प्रशंसकों और समर्थकों से भी एक खास अपील की है। विभाग का कहना है कि समर्थक भावुकता में बहने के बजाय प्रआर विवेकानंद को यह समझाएं कि वे अपने शासकीय दायित्वों का पालन नियमानुसार करें और अपनी प्रतिभा को सही और वैधानिक चैनल के माध्यम से देश के सामने लाएं।
विभाग ने अंत में ‘नो वर्क, नो पे’ के सिद्धांत को दोहराते हुए बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है।
“बिना शासकीय कार्य किए सरकारी खजाने से वेतन प्राप्त करना न तो वैधानिक रूप से संभव है और न ही यह नैतिक रूप से उचित है।”
शहडोल पुलिस।
Author: सुभाष गौतम
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