शहडोल। रीवा रोड स्थित न्यू बायपास पर संचालित आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के बेसमेंट के उपयोग को लेकर नगर पालिका परिषद शहडोल और अस्पताल प्रबंधन आमने-सामने आ गए हैं। नगर पालिका द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के बाद अस्पताल प्रबंधन ने विस्तृत जवाब प्रस्तुत करते हुए परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद का लाइसेंस, भवन कर की रसीदें तथा भूमि विकास नियमों का हवाला देकर अपने संचालन को वैधानिक बताया है।
नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी निशान्त सिंह ठाकुर द्वारा जारी पत्र क्रमांक 2599, दिनांक 13 जुलाई 2026 के अनुसार निरीक्षण के दौरान बेसमेंट का उपयोग स्वीकृत भवन अनुज्ञा की शर्तों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों एवं कथित दुकानों के संचालन के लिए पाया गया। नोटिस में मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम-2012 की धारा 76 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि बेसमेंट का उपयोग मुख्यतः वाहन पार्किंग, अज्वलनशील सामग्री के भंडारण अथवा तकनीकी एवं चिकित्सकीय उपकरणों की स्थापना तक सीमित है। अस्पताल प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने रखा अपना पक्ष
अस्पताल के संचालक डॉ. आदित्य द्विवेदी की ओर से नगर पालिका को दिए गए जवाब में कहा गया है कि बेसमेंट में संचालित सीटी स्कैन, फिक्स्ड एक्स-रे तथा कैथ लैब जैसी चिकित्सा इकाइयां परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद, मुंबई से विधिवत लाइसेंस प्राप्त हैं, जिसकी वैधता वर्ष 2030 तक है।
प्रबंधन का दावा है कि भूमि विकास नियम-2012 की धारा 76 के तहत आवश्यक सुरक्षा मानकों के साथ रेडिएशन आधारित चिकित्सा एवं डायग्नोस्टिक इकाइयों का संचालन बेसमेंट में किया जा सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि बेसमेंट में कोई अनधिकृत व्यावसायिक दुकान संचालित नहीं है तथा शेष क्षेत्र का उपयोग HVAC प्रणाली और चिकित्सा सामग्री के भंडारण के लिए किया जा रहा है। अस्पताल ने वर्ष 2025-26 के संपत्ति कर भुगतान की रसीद भी प्रस्तुत करते हुए बेसमेंट के क्षेत्रफल का विधिवत उल्लेख होने का दावा किया है।
कानूनी स्थिति क्या कहती है?
मामले के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर नजर डालें तो AERB का लाइसेंस रेडिएशन सुरक्षा और संबंधित उपकरणों के सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक अनुमति प्रदान करता है, लेकिन यह नगर पालिका से स्वीकृत भवन नक्शे अथवा भूमि उपयोग संबंधी अनुमति का विकल्प नहीं माना जाता।
इसी प्रकार संपत्ति कर का भुगतान किसी भवन के उपयोग को स्वतः वैध नहीं बनाता। यदि भवन का उपयोग स्वीकृत नक्शे अथवा लागू नियमों के विपरीत पाया जाता है तो उस पर पृथक वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं, यदि अस्पताल का दावा सही है कि बेसमेंट में कोई व्यावसायिक दुकान संचालित नहीं हो रही, तो इसकी पुष्टि नगर पालिका के स्थलीय निरीक्षण और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण से ही संभव होगी।
अब जांच पर टिकी निगाहें
पूरे मामले का केंद्र अब इस प्रश्न पर आकर टिक गया है कि नगर पालिका द्वारा स्वीकृत भवन नक्शे में बेसमेंट का उपयोग किस उद्देश्य के लिए अनुमोदित किया गया था तथा क्या उसमें मरीजों के आवागमन वाली कैथ लैब, सीटी स्कैन और अन्य चिकित्सा इकाइयों के संचालन की अनुमति शामिल है।
नगर पालिका द्वारा अस्पताल के जवाब, प्रस्तुत दस्तावेजों, स्वीकृत भवन मानचित्र, फायर सेफ्टी एनओसी तथा स्थलीय निरीक्षण के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। ऐसे में इस प्रकरण का अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही सामने आ सकेगा।












