सेमरिहा पंचायत में लाखों के भुगतान पर उठे सवाल, सचिव-रोजगार सहायक-उपयंत्री की भूमिका भी जांच के घेरे में

उमरिया। जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरिहा में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता के आरोपों ने पंचायत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत के उपसरपंच राम वर्ण मिश्रा ने संभागायुक्त शहडोल को शिकायत सौंपकर सरपंच एवं सचिव पर फर्जी बिलों के माध्यम से शासकीय राशि आहरित करने का आरोप लगाया है। शिकायत में पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, भौतिक सत्यापन, माप पुस्तिका, मस्टर रोल, तकनीकी स्वीकृतियों एवं भुगतान अभिलेखों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत के अनुसार ग्राम कन्नाबहरा की नल-जल योजना में समर्सिबल पंप फिटिंग के नाम पर बिल क्रमांक 11 एवं 12 से क्रमशः ₹99,947 और ₹99,934 का भुगतान किया गया। वहीं प्राथमिक विद्यालय सेमरिहा में बिजली फिटिंग के लिए बिल क्रमांक 224 एवं 225 के माध्यम से ₹99,999 और ₹99,970 की राशि निकाली गई। इसके अलावा ग्राम कन्नाबहरा में स्ट्रीट लाइट स्थापना के नाम पर बिल क्रमांक 1 से 10 तक लगभग ₹10 लाख के भुगतान का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि कई कार्य या तो धरातल पर नहीं दिखते या स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं किए गए।

‘99,999’ का गणित या नियमों से बचने की तकनीक?

लगातार ₹99,999, ₹99,970, ₹99,947 जैसी राशियों के भुगतान ने पूरे मामले को और संदेहास्पद बना दिया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक लाख रुपये की सीमा से कुछ कम राशि दर्शाकर भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाने और अतिरिक्त परीक्षण से बचने का प्रयास किया गया। यदि यह केवल संयोग है, तो इसकी पुष्टि जांच से होनी चाहिए; यदि नहीं, तो यह वित्तीय प्रक्रिया की गंभीर जांच का विषय बनता है।

क्या अकेले सरपंच-सचिव से निकल जाता है भुगतान?

पंचायत की भुगतान प्रक्रिया केवल सरपंच और सचिव तक सीमित नहीं होती। प्रस्ताव, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, ऑनलाइन प्रविष्टि, सत्यापन और भुगतान जैसी कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं अलग-अलग स्तरों से होकर गुजरती हैं। ऐसे में यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो स्वाभाविक रूप से संबंधित तकनीकी अधिकारियों, रोजगार सहायक तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक होगी। जांच के निष्कर्षों के बिना किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।

जांच की मांग, जवाबदेही की उम्मीद

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों से शासकीय राशि की वसूली तथा वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह इस शिकायत की जांच कितनी पारदर्शिता और गंभीरता से करता है।

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