शहडोल। आगामी 16 जुलाई 2026 को शहर के एक आलीशान होटल में ‘चिकित्सक सम्मान 2026’ का मंच सजने जा रहा है। मुख्य अतिथि के रूप में सूबे के उपमुख्यमंत्री और शहडोल के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल खुद मौजूद रहेंगे। कागजों पर यह आयोजन “निःस्वार्थ सेवा” करने वाले डॉक्टरों के सम्मान का है, लेकिन परदे के पीछे की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। शहडोल के गलियारों में इस प्रायोजित भव्यता के पीछे छिपे ‘गठजोड़’ को लेकर तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सम्मान’ के पीछे छिपे असली खेल का
‘आमंत्रित’ महफिल में सच से दूरी क्यों? आमंत्रण पत्र के नीचे बारीक अक्षरों में साफ लिखा है—”कार्यक्रम केवल आमंत्रित अतिथियों के लिए।”
सवाल उठता है कि जिस चिकित्सा बिरादरी का सीधा सरोकार जनता और मरीजों से है, उनके सम्मान समारोह में आम जनता, पीड़ितों या स्वतंत्र समाजसेवियों के प्रवेश पर पाबंदी क्यों है? क्या इसलिए कि बंद दरवाजों के पीछे सत्ता पक्ष और रसूखदार डॉक्टरों के बीच की ‘डील’ और वाहवाही में कोई खलल न पड़े?
शहर के ‘हृदय स्थल’ पर बेसमेंट का खेल
शहडोल के सबसे व्यस्ततम और प्राइम लोकेशन पर कई ऐसे निजी अस्पताल और क्लीनिक धड़ल्ले से फल-फूल रहे हैं, जो सीधे-सीधे सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
नियमों को ठेंगा
शहर के बीचों-बीच चल रहे कई नामी अस्पतालों की पैथोलॉजी, ओपीडी या क्रिटिकल यूनिट्स को बेसमेंट में धकेल दिया गया है, जो सीधे तौर पर फायर सेफ्टी और म्युनिसिपल एक्ट का उल्लंघन है।
प्रशासन की चुप्पी
किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठा स्थानीय प्रशासन इन ‘रसूखदारों’ के बेसमेंट वाले अस्पतालों पर कार्रवाई करने से बचता आया है, क्योंकि इन्हें ‘ऊपर’ का वरदहस्त प्राप्त है।
‘डॉक्टर-नेता भाई-भाई’ और फीता काटने की बेताबी
इस पूरे प्रायोजित खेल का सबसे दिलचस्प पहलू है ‘नेता-डॉक्टर नेक्सस’।
तैयार है फीता, बेताब हैं नेता
हमारे जनप्रतिनिधियों को बस फीता काटने, दीप प्रज्वलित करने और चमचमाती शील्ड बांटने का मौका मिलना चाहिए। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सम्मानित होने वाले डॉक्टर का अस्पताल वैध तरीके से चल रहा है या किसी तंग बेसमेंट में मरीजों की जान जोखिम में डालकर तिजोरी भर रहा है।
दाग धोने का ‘सस्ता’ फॉर्मूला
जब सत्ता दल के इतने बड़े चेहरे मंच पर आकर डॉक्टरों की पीठ थपथपाएंगे, तो स्थानीय प्रशासन की क्या मजाल कि वो इन ‘माननीयों’ के चहेते डॉक्टरों के अवैध बेसमेंट पर सील लगा सके? यह आयोजन दरअसल डॉक्टरों के रसूख और सत्ता की ताकत का एक मिलाजुला पीआर स्टंट मात्र नजर आता है।
जनता की सेहत पर भारी पड़ती ‘मखमली जुगलबंदी’
जब नियम बनाने वाले और नियमों को तोड़ने वाले एक ही मंच पर “भाई-भाई” बनकर एक-दूसरे को सम्मानित करने लगें, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रह जाती है।
क्या मुख्य अतिथि और प्रभारी मंत्री जी इस आलीशान होटल के मंच से उतरने के बाद शहडोल के उन ‘बेसमेंट’ वाले अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने की हिम्मत दिखाएंगे, जो सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं? या फिर “सेवा” के नाम पर यह प्रायोजित मूक-सहमति का खेल यूं ही चलता रहेगा?











