शहडोल। सोहागपुर जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत छतवई में प्रधानमंत्री आवास योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। सरकार की मंशा जहां हर गरीब को पक्का मकान देने की है, वहीं जमीनी स्तर पर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों और बिचौलियों की जुगलबंदी ने वास्तविक हितग्राहियों के सपनों पर पानी फेर दिया है।
छतवई पंचायत की जारी हुई ड्राफ्ट प्रायोरिटी लिस्ट में कई ऐसे चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं, जिन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
एक ही परिवार के कई सदस्यों को ‘रेवड़ियां’
जहां एक परिवार में एक ही आवास स्वीकृत होना चाहिए, लेकिन छतवई की सूची में एक ही परिवार के कई-कई सदस्यों के नाम शामिल कर उन्हें उपकृत किया गया है।
लखपतियों को प्राथमिकता, गरीबों के नाम पर चली ‘कैंची’
ग्राम पंचायत में ऐसे कई सक्षम और संपन्न परिवार हैं जो आर्थिक रूप से पूरी तरह सुदृढ़ हैं, जिनके पास पहले से ही पक्के मकान, गाड़ियां या खेती योग्य पर्याप्त भूमि है। ऐसे लखपतियों को सूची में शामिल कर लिया गया है, जबकि जो वास्तव में कच्चे टूटे-फूटे मकानों में रह रहे हैं और इस कड़कड़ाती ठंड या बारिश में छतों के लिए तरस रहे हैं, उनके नामों को सूची से ‘कैंची चलाकर’ गायब कर दिया गया है।
रोजगार सहायक और सचिव की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरी गड़बड़ी के पीछे ग्राम रोजगार सहायक और पंचायत सचिव रामशरण बैगा की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है। नियमतः मैदानी स्तर पर 10 बिंदुओं के पात्रता मानकों की कड़ाई से जांच करने की जिम्मेदारी इन्हीं की थी। लेकिन बिना भौतिक सत्यापन और सांठगांठ के चलते अपात्रों के नाम सूची में कैसे आ गए? ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक और सचिव ने मिलकर अपात्रों से सांठगांठ की और असली हकदारों को नजरअंदाज कर दिया।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और जनपद सीईओ सोहागपुर इस गंभीर धांधली और सचिव रामशरण बैगा द्वारा किए गए इस कथित खेल पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या छतवई के वास्तविक गरीब परिवारों को उनका हक मिल पाएगा या यह आवास भी रसूखदारों की तिजोरियां भरेंगे?










