नियमों की कड़ाई से नेताओं की ‘दुकानदारी’ बंद, युवा सीईओ को हटाने के लिए बनाया जा रहा अनावश्यक दबाव..

शहडोल। जनपद पंचायत गोहपारू में जब से एक युवा और कर्तव्यनिष्ठ मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुधीर दिनकर ने बागडोर संभाली है, तब से क्षेत्र के कुछ रसूखदार नेताओं और कथित ठेकेदारों की नींद उड़ी हुई है। सूत्रों की मानें तो हाल ही में सीईओ के खिलाफ लामबंद होकर कलेक्टर से जो शिकायतें की गई हैं, उनके पीछे विकास कार्यों की चिंता नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत ‘दुकानदारी’ और ‘ठेकेदारी’ बंद होने का गुस्सा है। 

क्यों निशाने पर हैं युवा सीईओ?

जनपद पंचायत गोहपारू में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए जब से कड़े कदम उठाए गए हैं, तब से कुछ चुनिंदा सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के समीकरण बिगड़ गए हैं। 

 मनमुताबिक काम न होना

नए सीईओ के आने के बाद से नेताओं के रसूख और उनके मनमुताबिक नियम-विरुद्ध कार्य होना पूरी तरह बंद हो गए हैं।

ठेकेदारी और कमीशनखोरी पर लगाम

सरकारी पैसों की बंदरबांट और अपात्रों को मर्जी से ठेके बांटने की प्रथा पर कड़ाई से रोक लगा दी गई है, जिससे बिचौलियों की ‘दुकानदारी’ ठप हो गई है।

 पारदर्शिता से बौखलाहट

तकनीकी स्वीकृति और शासकीय प्रस्तावों में पूरी तरह पारदर्शिता बरती जा रही है। इससे उन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है जो पहले पर्दे के पीछे से अपनी मर्जी चलाते थे।

शिकवा-शिकायतों की आड़ में ‘दबाव की राजनीति’

जब भ्रष्ट तरीकों से अपनी दाल नहीं गली, तो कुछ चुनिंदा लोगों ने एकजुट होकर सीईओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कलेक्टर के पास शिकायत लेकर पहुंचना और तरह-तरह के मनगढ़ंत आरोप, प्रत्यारोप लगाना, प्रशासनिक अधिकारी पर मानसिक और अनावश्यक दबाव बनाने का एक सोचा-समझा प्रयास है ताकि अधिकारी उनके आगे घुटने टेक दे।

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का कहना 

“जब भी कोई युवा और ईमानदार अधिकारी नियमों के तहत काम करना शुरू करता है, तो व्यवस्था का फायदा उठाने वाले भ्रष्ट तत्वों को सबसे ज्यादा तकलीफ होती है। यह पूरी कवायद सिर्फ इसलिए की जा रही है ताकि अधिकारी पर दबाव बनाया जा सके या उनका तबादला कराकर पुराना ढर्रा फिर से शुरू किया जा सके।”

प्रशासन को देखना होगा सच

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि जो लोग खुद को ‘जनप्रतिनिधि’ कहकर शिकायतें कर रहे हैं, उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक हित प्रभावित हुए हैं। जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों को इस तरह की दबाव की राजनीति को दरकिनार कर मामले की वास्तविक गहराई को समझना होगा, ताकि एक ईमानदार अधिकारी बिना किसी राजनीतिक भय के क्षेत्र के वास्तविक विकास के लिए काम कर सके।

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें