शहडोल। जनपद पंचायत बुढार के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बिलटिकुरी हमेशा से ही प्रशासनिक गलियारों और मीडिया की सुर्खियों में बनी रहती है। इसका मुख्य कारण यहाँ पदस्थ सचिव द्रोपदी प्रजापति की विवादित कार्यप्रणाली रही है। ताजा मामला सचिव के स्थानांतरण से जुड़ा है। चर्चा है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी सचिव द्वारा पंचायत में भुगतान प्रक्रियाओं को लेकर जिस तरह की जल्दबाजी और पैंतरेबाजी दिखाई जा रही है, उसने एक बार फिर पूरे जिले में सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
यह कोई पहली बार नहीं है जब बिलटिकुरी सचिव द्रोपदी प्रजापति अपनी मनमानी को लेकर चर्चा में हैं, वित्तीय अनियमितताओं और नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने का इनका पुराना इतिहास रहा है।
सरकारी दस्तावेज खोल रहे पुरानी गड़बड़ियों की पोल
सचिव की इसी विवादित कार्यप्रणाली और वित्तीय गड़बड़ी का एक बड़ा खुलासा सरकारी पत्र से होता है। इस आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, बिलटिकुरी पंचायत में पूर्व में भी नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपए का वारा-न्यारा किया जा चुका है।
3.45 लाख से अधिक का अनियमित भुगतान, ग्राम पंचायत बिलटिकुरी में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए सोलर स्ट्रीट लाइट क्रय कार्य में व्यापक गड़बड़ी पाई गई थी। मध्य प्रदेश भंडार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 (संशोधित 2022) का पालन किए बिना ही ₹ 3,45,631/- का अनियमित भुगतान कर दिया गया।
सेटिंग’ के ठेकेदार से कराया काम
ऊर्जा विभाग के तय स्पेसिफिकेशन को नजरअंदाज कर, लोक निर्माण विभाग की तकनीकी स्वीकृति का सहारा लेकर अपने ‘सेटिंग के ठेकेदार’ से काम कराया गया और उसे आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।
5 सदस्यीय दल ने की थी जांच
सीएम हेल्पलाइन क्रमांक 30922848 पर की गई शिकायत के बाद जनपद पंचायत बुढार के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 5 सदस्यीय जांच दल का गठन किया था, जिसमें यह गड़बड़ी पूरी तरह प्रमाणित पाई गई।
IAS शिवम प्रजापति ने जारी किया था नोटिस
इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला पंचायत शहडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवम प्रजापति ने मध्य प्रदेश पंचायत राज सेवा (आचरण) नियम 1998 के उल्लंघन के तहत सचिव और सरपंच को दोषी पाते हुए ‘कारण बताओ सूचना पत्र’ जारी कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
स्थानांतरण के बाद आखिर भुगतान की इतनी जल्दी क्यों?
क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि जब जिला पंचायत सीईओ द्वारा पहले ही गंभीर वित्तीय कदाचार और नियमों के उल्लंघन के लिए सचिव को कटघरे में खड़ा किया जा चुका है, तो स्थानांतरण आदेश आने के बाद भी वित्तीय प्रभार सौंपने और भुगतान प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का खेल क्यों खेला जा रहा है?
नियमों के विपरीत जाकर ‘सेटिंग’ के ठेकेदारों को उपकृत करने की आदी हो चुकी कार्यप्रणाली पर अब तक कोई ठोस और अंतिम दंडात्मक कार्रवाई न होना, कहीं न कहीं प्रशासनिक शिथिलता को भी उजागर करता है। ग्रामीणों और स्थानीय प्रबुद्ध जनों का कहना है कि स्थानांतरण के बाद पंचायत के खातों से होने वाले हर भुगतान की बारीकी से उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग रोका जा सके।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस नई सुगबुगाहट और पुराने नोटिसों के पुलिंदे पर क्या अंतिम कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
Author: सुभाष गौतम
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