पुराने नाडेप और लीच पिट के नाम पर लाखों का आहरण

शहडोल। जिले की जनपद पंचायत बुढार के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कुम्हारी में सरकारी खजाने में सेंधमारी का एक नया मामला सामने आया है। यहां 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग उन कार्यों के भुगतान के लिए किया गया है, जो कथित तौर पर दो साल पहले ही पूरे हो चुके हैं। बिना किसी नए निर्माण के, ‘रिवाइज्ड एस्टीमेट’ के नाम पर 1,10,000 रुपये की मोटी रकम डकारने का आरोप पंचायत पर लग रहा है।

क्या है पूरा मामला?

ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के वाउचरों के अनुसार, ग्राम पंचायत कुम्हारी में लीच पिट के लिए 67,500 रुपये और नाडेप निर्माण के नाम पर 42,500 रुपये का एकमुश्त भुगतान किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि आमतौर पर एक लीच पिट या नाडेप की मानक लागत 14,000 से 17,000 रुपये के बीच होती है। ऐसे में एक ही कार्य के लिए इतनी बड़ी राशि का आहरण क्षेत्र में चर्चा और जांच का विषय बना हुआ है।

नया काम नहीं, पुरानी फाइलों में ‘तेल’ डालने का खेल?

ग्रामीणों का आरोप है कि ये निर्माण कार्य लगभग दो वर्ष पूर्व ही संपन्न हो चुके हैं और इनका जियो-टैग भी किया जा चुका है। जब ग्रामीणों ने इस भारी-भरकम राशि के बारे में पूछताछ की, तो उन्हें बताया गया कि पुराने कार्यों को ‘रिवाइज’ कर यह भुगतान निकाला गया है।

 जानकारों के मुताबिक, किसी भी कार्य का एस्टीमेट कार्य शुरू होने से पहले या कार्य के दौरान रिवाइज किया जाता है। कार्य पूर्ण होने के दो साल बाद रिवाइज्ड एस्टीमेट के नाम पर भुगतान करना वित्तीय नियमों का खुला उल्लंघन है।

  ₹15,000 की वस्तु के लिए ₹67,000 का भुगतान किस आधार पर किया गया? क्या यह राशि इंजीनियर और सचिव की मिलीभगत से बंदरबांट की गई है?

 वाउचर में यह स्पष्ट नहीं है कि ये निर्माण किस स्थान पर या किसके घर के पास कराए गए हैं।

इंजीनियर और सचिव की भूमिका संदिग्ध

बिना किसी भौतिक सत्यापन और नए निर्माण के इतनी बड़ी राशि के बिल पास होना, संबंधित उपयंत्री और पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। सूत्रों का कहना है कि यह पूरा खेल कागजों पर सरकारी राशि को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से खेला गया है।

ग्रामीणों की मांग, हो उच्च स्तरीय जांच

कुम्हारी के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जिला पंचायत सीईओ से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि दो साल पुराने कार्यों पर दोबारा राशि निकाली गई है, तो यह सीधे तौर पर गबन का मामला है और दोषियों के विरुद्ध रिकवरी के साथ-साथ दंडात्मक कार्यवाही भी होनी चाहिए।

सुभाष गौतम
Author: सुभाष गौतम

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