शहडोल | जिले में सियासी पारा चढ़ने लगा है। जहाँ एक ओर दिग्गज नेता शक्ति प्रदर्शन और बड़े वादों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं गोहपारू क्षेत्र में एक ‘मौन क्रांति’ चर्चा का विषय बनी हुई है। यह क्रांति किसी नारे या झंडे की नहीं, बल्कि सुधीर प्रताप सिंह के उस सेवा भाव की है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में बिना किसी शोर-शराबे के जनता के दिलों में अपनी जगह पक्की कर ली है।
सत्ता के गलियारों से दूर, जन-गण के करीब
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि गोहपारू क्षेत्र में इस बार चुनावी गणित बदला हुआ नजर आ सकता है। इसका मुख्य कारण सुधीर प्रताप सिंह की वह कार्यशैली है, जो ‘कथनी’ से ज्यादा ‘करनी’ पर जोर देती है।
गांवों में मजबूत पैठ
चुहिरी, चुहिरा, माहौर टोला, हर्री, बारूतारा तक शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहाँ सुधीर प्रताप सिंह ने अपनी उपस्थिति दर्ज न कराई हो।
समस्या का समाधान, न कि केवल आश्वासन
बिजली कटौती हो या खराब सड़कें, उन्होंने केवल ज्ञापन नहीं सौंपे, बल्कि अधिकारियों के साथ फॉलोअप कर उन्हें हल करवाया।
सुधीर की ‘साइलेंट ब्रांडिंग काम बोलता है
क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि सुधीर प्रताप सिंह को किसी मंच या माइक की जरूरत नहीं पड़ती। उनके द्वारा किए गए कार्य—जैसे जरूरतमंदों को राशन पहुंचाना, शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं का मार्गदर्शन और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आधी रात को भी तत्पर रहना—उनकी सबसे बड़ी ‘ब्रैंडिंग’ बन चुके हैं।
“हमें नेता नहीं, अपना चाहिए। सुधीर दादा ने हर दुख-सुख में हमारे परिवार के सदस्य की तरह साथ निभाया है,”
रमेश केवट, एक स्थानीय ग्रामीण का बयान।
जानकारों की मानें तो चुनाव से ठीक लगभग एक साल पहले सुधीर प्रताप सिंह का यह बढ़ता प्रभाव मौजूदा सियासी समीकरणों को बिगाड़ सकता है। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी निर्मल छवि’और ‘एक्सेसिबिलिटी’ है। वह एक ऐसे व्यक्ति के रूप में उभरे हैं जिनसे मिलने के लिए किसी अपॉइंटमेंट या बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ती।
भविष्य की ओर इशारा
सुधीर प्रताप सिंह का कहना है कि “जनसेवा ही उनका मूल मंत्र है और जनता का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।” अब देखना यह होगा कि जनविश्वास का यह कारवां चुनाव तक क्या रुख अख्तियार करता है, लेकिन इतना तय है कि सुधीर प्रताप सिंह ने अपनी मेहनत से क्षेत्र की राजनीति में एक अमिट लकीर खींच दी है।












