ट्रांसफर के बाद लाखों का भुगतान, बिलटिकुरी पंचायत में नियमों को दरकिनार कर ‘उमेश ट्रेडर्स’ पर सचिव मेहरबान..?

शहडोल। जिले की बुढार जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बिलटिकुरी में निर्माणाधीन पुलिया कार्य को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों और स्थानीय लोगों के दावों के अनुसार पंचायत सचिव के तबादला आदेश जारी होने के बाद भी कथित रूप से वित्तीय अधिकारों का उपयोग करते हुए एक निजी फर्म “उमेश ट्रेडर्स” के खाते में लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। वहीं निर्माण कार्य में लगे मजदूरों और स्थानीय सप्लायरों का भुगतान अब तक लंबित बताया जा रहा है।

 ट्रांसफर के बाद दो दिन में भुगतान का आरोप

 प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार 15 जून 2026 को पंचायत सचिव का स्थानांतरण आदेश जारी हुआ। आरोप है कि इसके अगले दिन 16 जून को ‘उमेश ट्रेडर्स’ को पहली किस्त तथा 17 जून को दूसरी किस्त का भुगतान कर दिया गया।

 स्थानीय लोगों का कहना है कि भुगतान से पहले न तो तकनीकी मूल्यांकन कराया गया, न एम-बुक में कार्य का विधिवत मूल्यांकन दर्ज किया गया और न ही गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बावजूद लाखों रुपये जारी कर दिए गए।

 स्थानीय सप्लायरों की जगह बाहरी फर्म को भुगतान?

 ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण में गिट्टी, बालू, ईंट सहित अधिकांश सामग्री स्थानीय सप्लायरों द्वारा उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन भुगतान किसी स्थानीय व्यक्ति के बजाय उमेश ट्रेडर्स के नाम से किया गया। इससे पंचायत की भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 मजदूरों का भुगतान अटका

 निर्माण कार्य में लगे मजदूरों का कहना है कि कई दिनों से उनका मेहनताना नहीं मिला है। उनका आरोप है कि एक ओर निजी फर्म को भुगतान किया गया, जबकि दूसरी ओर मजदूरी का भुगतान लंबित रखा गया है। मजदूरों ने आशंका जताई है कि कहीं उनके भुगतान में भी अनियमितता न की गई हो।

 30 से अधिक शिकायतें, फिर भी कार्रवाई नहीं

 ग्रामीणों के अनुसार इस मामले में सीएम हेल्पलाइन 181 सहित विभिन्न स्तरों पर 30 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक न तो भुगतान पर रोक लगी है और न ही किसी उच्च स्तरीय जांच की जानकारी सामने आई है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष है।

 उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल

 स्थानांतरण आदेश के बाद सचिव ने किस अधिकार से वित्तीय भुगतान किए?

 यदि सामग्री स्थानीय स्तर पर खरीदी गई थी तो भुगतान बाहरी फर्म के नाम पर क्यों हुआ?

 बिना तकनीकी मूल्यांकन और एम-बुक प्रविष्टि के भुगतान कैसे स्वीकृत हुआ?

 लगातार शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने जांच या भुगतान पर रोक क्यों नहीं लगाई?

 ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

 बिना मूल्यांकन किए गए भुगतान की निष्पक्ष जांच कर राशि की रिकवरी की जाए।

 पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए।

 मजदूरों एवं वास्तविक सप्लायरों का लंबित भुगतान शीघ्र कराया जाए।

 जांच पूरी होने तक शेष भुगतान पर रोक लगाई जाए।

सुभाष गौतम
Author: सुभाष गौतम

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