शहडोल। विंध्य और शहडोल संभाग के स्वास्थ्य इतिहास में एक युगांतरकारी अध्याय की शुरुआत हुई है। संभाग के प्रतिष्ठित संस्थान आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, शहडोल ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के अंतर्गत अपनी दो सबसे महत्वपूर्ण और जीवन-रक्षक सुपरस्पेशलिटी सेवाओं—कार्डियोलॉजी और न्यूरोसर्जरी को पूर्ण रूप से संबद्ध कर शत-प्रतिशत निःशुल्क और कैशलेस उपचार सेवाएं प्रारंभ कर दी हैं।
इस ऐतिहासिक विस्तार के बाद शहडोल संभाग सहित निकटवर्ती जिलों जैसे डिंडोरी, मंडला, सीधी तथा सीमावर्ती छत्तीसगढ़ क्षेत्र के लाखों नागरिकों को अब हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर प्रत्यारोपण, ब्रेन हेमरेज, स्ट्रोक, सिर की गंभीर चोट और रीढ़ की हड्डी के जटिल ऑपरेशनों के लिए महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। पात्र परिवारों को यह सभी जीवन-रक्षक सेवाएं आधुनिक कैथ लैब, एडवांस्ड न्यूरो मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से पूर्णतः निःशुल्क मिलेंगी।
महानगरों पर निर्भरता और विस्थापन के दौर का अंत
अब तक शहडोल और विंध्य अंचल में तृतीयक स्तर की कार्डियोलॉजी और न्यूरोसर्जरी सुविधाएं न होने के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों को 300 से 800 किलोमीटर दूर जबलपुर, नागपुर, भोपाल, रायपुर या दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में ले जाने की विवशता थी। इस विवशता के दो अत्यंत घातक पहलू सामने आते थे।
समय का भारी नुकसान
महानगरों तक पहुंचने में 6 से 10 घंटे या उससे भी अधिक का समय लगता था। इस लंबी और कष्टप्रद यात्रा के दौरान रास्ते में ही गंभीर मरीजों की स्थिति बिगड़ जाती थी और अनेक लोग समय पर इलाज न मिलने से दम तोड़ देते थे।
आर्थिक विनाश और भारी कर्ज
महानगरों के निजी अस्पतालों में आईसीयू, एंजियोप्लास्टी और ब्रेन सर्जरी का खर्च ₹2 लाख से ₹7 लाख रुपये तक पहुंच जाता था। इस खर्च को वहन करने के लिए आदिवासी, ग्रामीण और निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों को अपनी कृषि भूमि बेचनी पड़ती थी, मवेशी गिरवी रखने पड़ते थे या भारी ब्याज पर साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था।
आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इन दोनों विभागों के पूर्ण संचालन से अब स्थानीय स्तर पर ही महानगरों के समकक्ष चिकित्सा सुविधाएं बिना एक भी पैसा खर्च किए उपलब्ध करा दी गई हैं।
‘गोल्डन आवर’ का महत्व समय पर स्थानीय चिकित्सा से जीवन रक्षा
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार किसी भी मेडिकल इमरजेंसी विशेषकर हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और एक्सीडेंटल ट्रॉमा—के बाद का शुरुआती समय ‘गोल्डन आवर’ कहलाता है। इस समयावधि में सही अस्पताल में सही उपचार मिलना ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है।
एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम और हार्ट अटैक
जब हृदय की कोरोनरी धमनी में अचानक थक्का जम जाता है, तो दिल की मांसपेशियों को रक्त और ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। दौरा पड़ने के पहले 60 से 90 मिनट के भीतर यदि अवरुद्ध नस को एंजियोप्लास्टी द्वारा खोल दिया जाए, तो हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान होने से 90 प्रतिशत तक बचाया जा सकता है।
ब्रेन स्ट्रोक, इस्केमिक स्ट्रोक में मस्तिष्क की नस में रुकावट आने पर प्रति मिनट लगभग 19,000 न्यूरॉन्स नष्ट होते हैं। आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की चौबीसों घंटे सक्रिय कैथ लैब में मरीज के आते ही न्यूनतम ‘डोर-टू-बैलून टाइम’ में तत्काल प्राथमिक एंजियोप्लास्टी कर नस को खोल दिया जाता है, जिससे मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटता है।
आयुष्मान भारत योजना
प्रति वर्ष ₹5,00,000 तक का सुरक्षा कवच आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को प्रतिवर्ष ₹5,00,000 तक का निःशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्रदान किया जाता है।
कैशलेस और पेपरलेस सुविधा
आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में यह व्यवस्था पूरी तरह कैशलेस और पेपरलेस संचालित होती है।
भर्ती और आईसीयू शुल्क
जनरल वार्ड से लेकर एडवांस्ड क्रिटिकल केयर आईसीयू तक का पूरा खर्च योजना के अंतर्गत शामिल है।
जांच एवं डायग्नोस्टिक्स
उपचार से पूर्व और उपचार के दौरान आवश्यक सभी रक्त जांचें, डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन और इकोकार्डियोग्राफी निःशुल्क हैं।
सर्जरी एवं इम्प्लांट्स
ऑपरेशन थिएटर का शुल्क, सर्जिकल टीम की फीस, उच्च गुणवत्ता वाले कोरोनरी स्टेंट्स, पेसमेकर, स्पाइनल स्क्रू और रॉड्स पूर्णतः योजना के तहत कवर हैं।
दवाएं एवं कंज्यूमेबल्स
अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान दी जाने वाली समस्त दवाएं, डिस्पोजेबल और सर्जिकल सामग्री पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
अस्पताल प्रबंधन का संदेश एवं जन-अपील
आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. आदित्य द्विवेदी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा “हमारा एकमात्र संकल्प यह है कि विंध्य और शहडोल संभाग का कोई भी नागरिक उचित इलाज के अभाव में, पैसों की तंगी के कारण या महानगरों की भौगोलिक दूरी की वजह से अपनी जान न गंवाए। कार्डियोलॉजी और न्यूरोसर्जरी जैसी अति-विशिष्ट, जटिल और महंगी विधाओं को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ना हमारे सामाजिक सरोकार और जनसंसाधन के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”
अस्पताल प्रशासन ने क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक से विनम्र अपील की है कि सीने में दर्द, भारीपन, सांस फूलने, अचानक पसीना आना, हाथ-पैरे में कमजोरी, मुंह टेढ़ा होने, बोलने में लड़खड़ाहट अथवा सड़क दुर्घटना में सिर की चोट जैसे लक्षणों को तनिक भी नजरअंदाज न करें। अंधविश्वास या गैर-प्रमाणित इलाज में कीमती समय व्यर्थ किए बिना सीधे अस्पताल पहुंचकर सरकार की इस जनकल्याणकारी योजना के माध्यम से अपने प्रियजनों की जीवन रक्षा सुनिश्चित करें।













