शहडोल। राजा विराट की नगरी, जहाँ पांडवों ने अपने अज्ञातवास का समय बिताया था, आज अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। शहडोल का ऐतिहासिक बाणगंगा मेला, जो पिछले 125 वर्षों से सभ्यता और सनातनी परंपरा का प्रतीक रहा है, आज नगर पालिका की लापरवाही के कारण ‘डांस बार’ में तब्दील होता नजर आ रहा है। मेले के सांस्कृतिक मंच से परोसी जा रही फूहड़ता ने स्थानीय लोगों और धर्मप्रेमियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
भजन की जगह अश्लील गानों की गूंज
कभी बाणगंगा मेले की शामें लोकगीतों और भजनों से गुलजार होती थीं, लेकिन इस वर्ष मकर संक्रांति के पावन अवसर पर नजारा बिल्कुल उलट है। ‘पीले पीले ओठों से शराब बन जाऊंगी’ जैसे द्विअर्थी और फूहड़ गानों पर होने वाली प्रस्तुतियों ने विराट मंदिर की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सांस्कृतिक मंच के नाम पर सनातन धर्म की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई जा रही है।
शराब की दुकान और सुरक्षा में चूक
मेले की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए नागरिकों ने बताया कि ऐतिहासिक विराट मंदिर के समीप ही स्थित कंपोजिट शराब की दुकान के सामने खुलेआम मयखाना सज रहा है। महिलाएं और बच्चे वहीं से गुजरने को मजबूर हैं, लेकिन नगर पालिका परिषद ने सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेडिंग तक करना उचित नहीं समझा।
भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में ‘सांस्कृतिक टेंडर’
सूत्रों की मानें तो सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए लगभग 5 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था। आरोप है कि नगर पालिका परिषद के कुछ अधिकारियों ने निजी लाभ और भ्रष्टाचार के चलते ऐसी निम्न स्तर की टीमों को आमंत्रित किया, जिन्होंने कला के नाम पर केवल अश्लीलता परोसी। मेले में कहीं भी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, व्यापारियों की रेट सूची या सुरक्षा मापदंडों के होर्डिंग्स नहीं हैं; केवल जनप्रतिनिधियों के बड़े-बड़े विज्ञापनों से मैदान पटा पड़ा है।
स्थानीय दुकानदारों की अनदेखी, बाहरी व्यक्तियों को तरजीह
स्थानीय व्यापारियों ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि बाहरी व्यक्तियों को मेले के सबसे बड़े हिस्से में दुकान लगाने की छूट दी गई है, जबकि स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है। यह जांच का विषय है कि आखिर किन नियमों के तहत किसी एक विशेष प्रतिष्ठान को इतना बड़ा क्षेत्रफल आवंटित किया गया।
हिंदू संगठनों से हस्तक्षेप की मांग
आक्रोशित सनातनी समाज ने अब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। लोगों की मांग है कि।
सातों दिन केवल भजन, जागरण और धार्मिक कार्यक्रमों का ही आयोजन हो।
अश्लीलता परोसने वाले ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
नगर पालिका परिषद अपनी इस गलती के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
विराट मंदिर की पुरातात्विक कलाकृतियां शहडोल को विश्व पटल पर पहचान दिलाती हैं, लेकिन इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही शहडोल की छवि को धूमिल कर रही है। यदि समय रहते इन ऐतिहासिक मेलों की मर्यादा नहीं बचाई गई, तो यह केवल एक व्यापारिक केंद्र बनकर रह जाएगा और इसकी आध्यात्मिक आत्मा लुप्त हो जाएगी।
Author: सुभाष गौतम
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