शहडोल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शहडोल जिले के प्रवास पर हैं। उनके हाथों आज जिले को करोड़ों की सौगातें मिलने वाली हैं, जिसमें धनपुरी का अत्याधुनिक वाटर पार्क और माता शबरी की प्रतिमा का अनावरण प्रमुख है। लेकिन इन चमक-धमक वाले आयोजनों के बीच जिले की कुछ ऐसी कड़वी सच्चाइयां भी हैं, जो मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए खड़े जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठा रही हैं।
विकास की नई सौगात, 20 करोड़ का वाटर पार्क और रोजगार
मुख्यमंत्री आज धनपुरी नगरपालिका द्वारा 20 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नवनिर्मित वाटर पार्क का लोकार्पण करेंगे। मिनी ओलंपिक मापदंडों वाले इस पार्क में क्लब हाउस और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं हैं। इसके साथ ही, एसईसीएल द्वारा अधिग्रहित भूमि के 15 हितग्राहियों को नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे, जो लंबे समय से रोजगार की आस लगाए बैठे थे। इसके अलावा वनाधिकार पट्टे और स्व-सहायता समूहों को सीसीएल वितरण कर सरकार अपनी ‘कल्याणकारी’ छवि को पुख्ता करने की कोशिश करेगी।
दिखावे की चकाचौंध में गुम बुनियादी दर्द
एक तरफ वाटर पार्क का जश्न है, तो दूसरी तरफ जिले के सबसे बड़े संस्थान मेडिकल कॉलेज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा हैं। विशेषज्ञों और सुविधाओं के अभाव में शहडोल का मेडिकल कॉलेज महज एक ‘स्टॉपेज’ बनकर रह गया है, जहाँ से मरीजों को जबलपुर या नागपुर रेफर करना मजबूरी बन चुकी है।
जमीन पर सुधार होगा या सिर्फ फाइलों में?
प्रशासनिक गलियारों और जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल ‘लोकार्पण’ तक सीमित रहेगा?
क्या भू-माफियाओं और नशे के अवैध कारोबार पर नकेल कसने के लिए कड़े निर्देश दिए जाएंगे या ये धंधे इसी तरह फलते-फूलते रहेंगे?
क्या क्षेत्र के विधायक और नेता मुख्यमंत्री के सामने जनता की वास्तविक समस्याओं (सड़क, बिजली,पानी, स्वास्थ्य) को रखने का साहस जुटा पाएंगे, या वे केवल निजी लाभ और स्वागत-सत्कार में उलझे रहेंगे?
शहडोल की जनता आज मुख्यमंत्री की ओर इस उम्मीद से देख रही है कि वे केवल घोषणावीर साबित न हों, बल्कि उन पुरानी घोषणाओं को भी पूरा करें जो धूल फांक रही हैं। अब देखना यह है कि डॉ. मोहन यादव का यह दौरा शहडोल की बदहाली को ‘सुहाली’ में बदल पाता है या नहीं।
Author: सुभाष गौतम
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