भ्रष्टाचार का “अमृत” पी रहे मुर्दे, 9 साल पहले मृत व्यक्ति ने कागजों पर खोदा तालाब

शहडोल। जिले में भ्रष्टाचार का एक ऐसा “चमत्कारी” मामला सामने आया है, जहाँ यमराज भी सरकारी सिस्टम के आगे हार मान गए हैं। जनपद पंचायत बुढार की ग्राम पंचायत कुम्हारी में ‘अमृत सरोवर’ योजना के तहत एक ऐसे व्यक्ति से मजदूरी कराई जा रही है, जिसकी मृत्यु 9 साल पहले हो चुकी है। कागजों पर मुर्दा न केवल फावड़ा चला रहा है, बल्कि उसके नाम पर सरकारी राशि का डंके की चोट पर गबन भी किया गया है।

फाइल में ‘अमर’ हुआ रामप्रमोद का जॉब कार्ड

दस्तावेजों की पड़ताल में सामने आया कि रामप्रमोद कुशवाहा (जॉब कार्ड नंबर 259) की मृत्यु 28 अगस्त 2017 को ही हो चुकी है। लेकिन सरकारी फाइलों में रामप्रमोद “जिंदा” और “कर्मठ मजदूर” है। मस्टर रोल नंबर 2736 के मुताबिक, ‘अमृत सरोवर नया तालाब करौंदी’ के काम में मृतक रामप्रमोद को मई 2023 में 5 दिन उपस्थित दिखाया गया और उनके नाम पर ₹950 का भुगतान भी निकाल लिया गया?

सिस्टम की मिलीभगत या अंधेरगर्दी?

यह फर्जीवाड़ा केवल एक मानवीय भूल नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

मस्टर रोल भरते समय मौके पर भौतिक सत्यापन किसने किया?

बैंक खाते से यह राशि किसके द्वारा और किसकी आईडी का उपयोग करके निकाली गई?

शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार ‘मौन’

ग्रामीणों का आरोप है कि इस धांधली की जानकारी जनपद से लेकर कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और कमिश्नर तक को दी जा चुकी है, लेकिन मजाल है कि किसी अधिकारी के कान पर जूं रेंग जाए। प्रशासन की चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या इस गबन में पंचायत से लेकर जनपद तक के बड़े चेहरों को भी ‘हिस्सा’ मिला है?

सवालों के घेरे में ‘अमृत सरोवर’

शासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘अमृत सरोवर’, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण है, यहाँ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। जब एक मृत व्यक्ति के नाम पर पैसा निकाला जा सकता है?, इसकी निष्पक्ष जांच होनी अनिवार्य है।

अब देखना यह होगा कि इस पुख्ता साक्ष्य के सामने आने के बाद जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर ‘मुर्दों से मजदूरी’ का यह काला खेल इसी तरह जारी रहेगा।

सुभाष गौतम
Author: सुभाष गौतम

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