शासकीय माध्यमिक शाला नंदना में मध्यान्ह भोजन में गंभीर अनियमितता, बच्चों से थाली धुलवाने और मीनू उल्लंघन का आरोप

शहडोल। शासकीय माध्यमिक शाला नंदना, विकासखंड सोहागपुर में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना पर गंभीर अनियमितताओं के बादल छा गए हैं। शाला प्रभारी पर जहां शासन द्वारा निर्धारित पोषण युक्त मीनू के अनुसार भोजन नहीं देने का आरोप है, वहीं विद्यार्थियों से मध्यान्ह भोजन उपरांत थाली धुलवाने जैसा बाल श्रम का उल्लंघन करने का भी गंभीर आरोप लगा है।

मीनू उल्लंघन और पौष्टिक आहार की कमी

सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शाला प्रभारी और माध्यमिक शिक्षक संजय पाठक पर शासन द्वारा निर्धारित साप्ताहिक मीनू का पालन न करने का आरोप है।
रोटी अनुपलब्ध

सबसे महत्वपूर्ण अनियमितता यह है कि बच्चों को रोटी कभी नहीं परोसी जाती है। यह तब है जब शासन द्वारा प्रति माह विद्यालय को गेहूँ का पर्याप्त आवंटन किया जाता है।

संतुलित आहार नहीं

शाला के ही शिक्षक, सूर्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि बच्चों को मीनू के अनुसार संतुलित आहार नहीं मिल रहा है, जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर पर पड़ रहा है।
शिक्षक का बयान: “बच्चों को मीनू के अनुसार संतुलित आहार नहीं मिल रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। रोटी न मिलने से गेहूँ का पोषण बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है।”

बाल अधिकारों का उल्लंघन, बच्चों से थाली धुलवाने का आरोप

मध्यान्ह भोजन में अनियमितता के साथ ही, शाला प्रभारी पर एक और गंभीर आरोप लगा है जो बाल अधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

शाला प्रभारी पर आरोप है कि वे विद्यार्थियों को डांट-फटकार या धमकी देकर मध्यान्ह भोजन के बाद उनसे थालियाँ धुलवाते हैं।

शासन के निर्देशों के विपरीत

शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, छात्रों से ऐसा कोई कार्य नहीं करवाया जा सकता जो उनकी पढ़ाई बाधित करे या बाल श्रम की श्रेणी में आए। यह कार्य बाल हितैषी शिक्षा नीति और शासन के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग

शिक्षक सूर्य प्रकाश तिवारी ने इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।

उनका कहना है कि योजना का संचालन पारदर्शी और बाल हितैषी रूप से सुनिश्चित किया जाए।

 तत्काल जांच कर दोषी पाए गए व्यक्ति पर कार्रवाई हो, ताकि बच्चों को उनका हक और सही पोषण मिल सके तथा बाल अधिकारों का उल्लंघन रोका जा सके।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब तक संज्ञान लेता है और शाला में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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