विश्वविद्यालय में ₹75 करोड़ के फंड पर सवाल, कागजों में 100% खर्च, जमीनी हकीकत कुछ और?

 शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय, शहडोल एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में है। आरोप है कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान और प्रधानमंत्री उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय को प्राप्त लगभग ₹75 करोड़ की राशि के उपयोग को लेकर सरकारी अभिलेखों और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय को RUSA के तहत ₹55 करोड़ तथा PM-USHA योजना के तहत ₹20 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई थी। उपलब्ध दस्तावेजों में RUSA की राशि का 100 प्रतिशत उपयोग दर्शाया गया है, जबकि परिसर में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।

कागजों में विकास, परिसर में अव्यवस्था?

विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार।

 कई प्रयोगशालाओं में आज भी लगभग 10 वर्ष पुराने अथवा एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके रसायनों से कार्य कराया जा रहा है।

आधुनिक लैब उपकरणों और शोध सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो सका।

छात्रों और कर्मचारियों के लिए शौचालय एवं स्वच्छता व्यवस्था संतोषजनक नहीं बताई जा रही है।

पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से आवश्यक कंप्यूटर, प्रिंटर एवं अन्य आईटी संसाधनों की खरीद नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे कई कर्मचारी निजी लैपटॉप एवं मोबाइल से सरकारी कार्य करने को विवश हैं।

यह भी आरोप है कि विकास कार्यों में खर्च किए जाने वाले सरकारी फंड का एक हिस्सा बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा गया, जबकि परिसर की कई आवश्यक परियोजनाएं अधूरी हैं।

 विश्वविद्यालय परिसर की संपत्तियों के निजी आयोजनों एवं समारोहों में उपयोग किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

जिम्मेदार अधिकारियों पर उठे सवाल

मामले में विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

 कुलपति प्रो. रामशंकर दुबे,  विश्वविद्यालय के समग्र प्रशासन एवं वित्तीय निर्णयों की जिम्मेदारी।

प्रो. प्रवीन शर्मा, विभागीय संसाधनों एवं बजट प्रबंधन से संबंधित दायित्व।

डॉ. योगिता बसेने,  विभागीय प्रशासन एवं कार्यक्रम संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। 

फोरेंसिक ऑडिट की मांग

मामले को लेकर शिक्षकों, विद्यार्थियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों द्वारा उच्च शिक्षा विभाग एवं शिक्षा मंत्रालय से मांग की जा रही है कि RUSA एवं PM-USHA के तहत जारी राशि के उपयोगिता प्रमाणपत्र की स्वतंत्र एवं फोरेंसिक ऑडिट कराई जाए। साथ ही यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं होगा, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों के भविष्य और सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ा गंभीर विषय माना जाएगा।

सुभाष गौतम
Author: सुभाष गौतम

जनहित के लिए बुलंद आवाज

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें