शहडोल। जिले की सोहागपुर तहसील में तहसीलदार सुमित गुर्जर के कथित दुर्व्यवहार और एक अधिवक्ता के साथ मारपीट के आरोपों को लेकर पिछले 15 दिनों से भी अधिक समय से अधिवक्ता काम का बहिष्कार कर रहे हैं। वकीलों के इस व्यापक विरोध के चलते तहसील का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे क्षेत्र के आम लोग जो राजस्व संबंधी कार्यों के लिए तहसील आते हैं, उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह विवाद 4 सितंबर की शाम को तब शुरू हुआ जब राजस्व अधिवक्ता रविंद्र जायसवाल अपने पेशेवर कार्य (बीएनएस की धारा 115,116) को लेकर तहसीलदार सुमित गुर्जर से मिलने गए थे। आरोप है कि किसी बात को लेकर तहसीलदार और वकील के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद तहसीलदार सुमित गुर्जर ने कथित तौर पर अधिवक्ता जायसवाल को कमरे में बंद करवाकर अपने स्टाफ से उनकी पिटाई करवाई। हालांकि, तहसीलदार सुमित गुर्जर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
विरोध का सिलसिला और अधिकारियों की ‘चुप्पी’
इस घटना के बाद से ही अधिवक्ता संघ एकजुट हो गया है और तहसीलदार सुमित गुर्जर के तत्काल स्थानांतरण की मांग पर अड़ा है।
विरोध प्रदर्शन : राजस्व अभिभाषक संघ सोहागपुर एवं जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राकेश सिंह बघेल के समर्थन से अधिवक्ता लगातार कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं।
ज्ञापन : अधिवक्ताओं ने इस मामले में कलेक्टर, कमिश्नर, विधायक सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ठप कामकाज, जनता परेशान
अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार के कारण सोहागपुर तहसील में राजस्व संबंधी सभी प्रकरणों की सुनवाई, नामांतरण, बँटवारा, सीमांकन और अन्य आवश्यक कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। स्थानीय लोगों के काम रुके हुए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय से चल रहे इस गंभीर गतिरोध के बावजूद कलेक्टर और कमिश्नर जैसे जिले के शीर्ष अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि अधिकारियों के कानों में ‘जूं तक नहीं रेंग रही’ और वे अपनी रुखे व्यवहार और लापरवाही से इस पूरे मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं।
विरोध कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक तहसीलदार सुमित गुर्जर का स्थानांतरण सोहागपुर से नहीं किया जाता, तब तक उनका यह बहिष्कार जारी रहेगा। इस मामले ने शहडोल जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, कि वे आखिर क्यों एक अधिवक्ता और तहसीलदार के बीच के विवाद को हल करने में इतनी उदासीनता दिखा रहे हैं, जबकि इससे आम जनता का काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
इस गतिरोध को समाप्त करने और जनहित में प्रशासनिक व्यवस्था को बहाल करने के लिए कलेक्टर और कमिश्नर की ओर से त्वरित हस्तक्षेप और प्रभावी निर्णय का इंतज़ार है।









