शहडोल। जनपद पंचायत सोहागपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत छतवई इन दिनों विकास कार्यों के नाम पर हो रही लूट का केंद्र बन गई है। नल जल योजना पंप हाउस से बजाड़ी बैगा के घर की ओर बन रही सीसी रोड गुणवत्ता और पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा रही है। आलम यह है कि जिम्मेदार अधिकारी ‘सुख-सुविधाओं’ की नींद सो रहे हैं और जनता के टैक्स का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।
गोपनीयता का खेल; न बोर्ड, न लागत का पता
किसी भी सरकारी निर्माण कार्य का पहला नियम ‘सूचना पटल’ लगाना है, ताकि जनता को कार्य की लागत, लंबाई और एजेंसी की जानकारी हो। लेकिन बड़ी छतवई में इस नियम को कचरे के डिब्बे में डाल दिया गया है।
सड़क कहाँ से कहाँ तक बननी है? बजट कितना है? यह किसी को नहीं पता।
यह गोपनीयता केवल एक ही संकेत देती है—अंधेरे में रहकर बंदरबांट करना।
अनाड़ी ठेकेदार और ‘धृतराष्ट्र’ बने इंजीनियर
क्षेत्र में चर्चा है कि पूरे कार्य की कमान एक ऐसे ‘अनाड़ी’ ठेकेदार को सौंप दी गई है जिसे निर्माण की तकनीकी समझ तक नहीं है। लेकिन विडंबना देखिए, सेक्टर इंजीनियर आशुतोष शर्मा का इस तथाकथित ठेकेदार पर अंधविश्वास’ बना हुआ है क्या इंजीनियर साहब किसी खास ठेकेदार के प्रति अपनी निष्ठा निभा रहे हैं या फिर कमीशन के बोझ तले दबे हैं?” — यह सवाल आज हर ग्रामीण की जुबान पर है।
मशीनों का तांडव और चोरी की रेत
जहाँ शासन मजदूरों को रोजगार देने के लिए मनरेगा (अब नाम बदल गया) जैसी योजनाएं चला रहा है, वहीं यहाँ मशीनों से काम करवाकर मजदूरों का हक मारा जा रहा है। सोने पर सुहागा यह कि निर्माण में बिना रॉयल्टी की चोरी की रेत का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा था। इंजीनियर को सब ज्ञात होने के बावजूद कार्रवाई न करना, उनकी संलिप्तता की ओर सीधा इशारा करता है।
साहब’ लोग व्यस्त हैं;कमीशन फिक्स, काम मिक्स
भ्रष्टाचार के इस खेल में केवल इंजीनियर ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी संदेहास्पद है।
SDO इन्हें ‘प्रभु’ की संज्ञा दी जा रही है, जिनके पास घटिया निर्माण देखने की फुर्सत नहीं है।
CEO ये जिला स्तर की बैठकों और कार्यक्रमों में अपनी ‘पोजीशन’ चमकाने में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें जमीनी स्तर पर हो रहे नुकसान से कोई सरोकार नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बस अपना ‘हिस्सा’ समय पर चाहिए, बाकी जनता जाए भाड़ में।
पहली बारिश में ढह जाएंगे दावों के महल
निर्माण की गुणवत्ता इतनी निम्न है कि ग्रामीणों का मानना है कि यह सड़क एक बरसात भी नहीं झेल पाएगी। यदि ऐसा हुआ, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी बल्कि उन करदाताओं के साथ भद्दा मजाक होगा जिनकी गाढ़ी कमाई से ये सड़कें बनती हैं।
ग्रामीणों की मांग, उच्च स्तरीय जांच हो
बड़ी छतवई के आक्रोशित ग्रामीणों ने अब जिला कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों से इस ‘इंजीनियर-ठेकेदार-अधिकारी’ नेक्सस को तोड़ने की मांग की है। यदि समय रहते निर्माण कार्य की तकनीकी जांच नहीं हुई, तो यहाँ सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि प्रशासन का इकबाल भी दफन हो जाएगा।
Author: सुभाष गौतम
जनहित के लिए बुलंद आवाज











