शहडोल। कहते हैं नाम का असर काम पर पड़ता है, लेकिन शहडोल जिले की गोहपारू जनपद पंचायत में यह कहावत सिर के बल खड़ी नजर आ रही है। यहाँ खन्नौधी सेक्टर की कमान संभाल रहे उपयंत्री पवन वर्मा जी का “पवन” वाला गुण केवल फाइलों को उड़ाने और विकास कार्यों को हवा में लटकाने तक ही सीमित है।
हालात यह हैं कि इनके कार्यक्षेत्र में ‘विकास’ कछुए की चाल चल रहा है, लेकिन जनता और अधिकारियों का ‘ब्लड प्रेशर’ पवन की गति से बढ़ रहा है।
चुहिरी के बाद अब खन्नौधी का ‘नंबर’
उपयंत्री जी का ट्रैक रिकॉर्ड भी माशाअल्लाह रहा है! पहले चुहिरी सेक्टर की पंचायतों का “उद्धार” किया, वहां की जनता और सरपंच-सचिवों को खून के आंसू रुलाए, और अब अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने खन्नौधी सेक्टर पधारे हैं। खन्नौधी में आते ही उन्होंने साबित कर दिया कि जगह बदल सकती है, लेकिन “लटकाने और भटकाने” का हुनर नहीं।
सर्व-दुःख निवारण नहीं, ‘सर्व-दुःख कारण’
आमतौर पर पंचायत में सरपंच, सचिव और उपयंत्री को विकास का पहिया माना जाता है। लेकिन यहाँ उपयंत्री जी ने ऐसा ब्रेक लगाया है कि पूरी गाड़ी ही जाम है।
सरपंच-सचिव: फाइल लेकर जाते हैं तो साहब ऐसे नियम बताते हैं जो शायद संविधान में भी न लिखे हों।
आम जनता: इनका काम करने का तरीका ऐसा है कि फरियादी अपनी समस्या भूलकर यह सोचने लगता है कि “साहब से मिलना ही सबसे बड़ी समस्या थी।”
अधिकारी: जनपद के बड़े साहबान भी इनसे कतराते नजर आते हैं। शायद उन्हें डर है कि कहीं उपयंत्री जी अपनी “हवा” का रुख उनकी तरफ न मोड़ दें।
सीएम हेल्पलाइन: उपयंत्री जी की ‘फैन बुक’
इनके कारनामे केवल जुबानी नहीं हैं, बल्कि लिखित में भी दर्ज हैं। सीएम हेल्पलाइन में इनकी शिकायतों का अंबार लगा है। वहां इनका नाम इतनी बार दर्ज है, जितना शायद हाजिरी रजिस्टर में भी न हो। लेकिन मजाल है कि इनके रसूख पर कोई आंच आए! शिकायतें आती रहती हैं, और पवन जी अपनी मस्ती में बहते रहते हैं।
आखिर मुक्ति कब?
अब खन्नौधी सेक्टर के हर नुक्कड़ पर एक ही चर्चा है—”इस ‘पवन’ से हमें कब मिलेगा छुटकारा?” विकास कार्यों की फाइलें धूल फांक रही हैं और उपयंत्री जी शायद किसी नए बहाने की खोज में हैं।
जनप्रतिनिधियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक सब परेशान हैं, लेकिन बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे? फिलहाल तो खन्नौधी सेक्टर की जनता बस यही गा रही है— “पवन करे शोर, काम न हो एक भी ओर!
नोट: यह खबर जनचर्चा और प्राप्त शिकायतों पर आधारित एक व्यंग्य है। इसका उद्देश्य सोए हुए तंत्र को जगाना है, न कि किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को आहत करना।











