गोहपारू जनपद में बदला विकास का स्वरूप, सीईओ सुधीर दिनकर की कार्यशैली से आई नई ऊर्जा

शहडोल। किसी भी प्रशासनिक इकाई की सफलता उसके नेतृत्वकर्ता की इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है। यह बात शहडोल जिले की गोहपारू जनपद पंचायत पर सटीक बैठती है, जहाँ मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में सुधीर दिनकर के पदभार संभालते ही व्यवस्थाओं में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहा है।


भ्रष्टाचार के गढ़ से विकास की ओर

एक समय था जब गोहपारू जनपद पंचायत कथित भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं के कारण आए दिन सुर्खियों में रहती थी। लेकिन पिछले लगभग तीन महीनों में स्थिति पूरी तरह बदल गई है। सीईओ सुधीर दिनकर ने न केवल कार्यालयीन व्यवस्था को पटरी पर लाया है, बल्कि अनुशासन का एक नया मानक भी स्थापित किया है।

उपलब्धियों भरा रहा कार्यकाल

अल्प समय में ही सीईओ के नेतृत्व में जनपद ने कई कीर्तिमान रचे हैं।

तिरंगा यात्रा: क्षेत्र में भव्य और सफल आयोजन।


रैंकिंग में शीर्ष: एसआईआर (SIR) प्रगति में

गोहपारू जनपद ने पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

आकांक्षी योजना: शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन में जनपद ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।


हड़ताल में भी नहीं रुका काम।

हाल ही में इंजीनियरों की हड़ताल के दौरान, जब 58 पंचायतों की जिम्मेदारी मात्र दो इंजीनियरों के कंधों पर थी, तब भी सीईओ की कुशल रणनीति के कारण विकास कार्य नहीं थमे।

परिवार के मुखिया जैसी भूमिका

सीईओ दिनकर की कार्यशैली “कठोर प्रशासक और संवेदनशील अभिभावक” का मिश्रण है। वे अपने मातहत कर्मचारियों को परिवार के मुखिया की तरह छोटी-मोटी गलतियों पर समझाते हैं, लेकिन काम में लापरवाही या भ्रष्टाचार की पुनरावृत्ति होने पर दंडात्मक कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटते। उनका स्पष्ट कहना है, “हम यहाँ जनता के हित और लाभ के लिए तैनात हैं, इसमें कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

समीक्षा बैठक में दिए कड़े निर्देश

इसी तारतम्य में आज मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने सहायक यंत्री, उपयंत्री, पंचायत समन्वय अधिकारी और समस्त कार्यालयीन स्टाफ के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा की और जिन कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी, उन्हें लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं में जल्द से जल्द संतोषजनक प्रगति लाई जाए ताकि ग्रामीण जनता को उनका हक मिल सके।

निश्चित रूप से, गोहपारू जनपद में आया यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व ईमानदार और दृढ़ हो, तो तस्वीर बदलते देर नहीं लगती।

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