शहडोल। जिले के बुढार जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजना अब केवल गड्ढे खोदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के भविष्य को हरा-भरा बनाने का जरिया बन रही है। क्षेत्र की ग्राम पंचायत सेजहाई, नवाटोला, और कदौड़ी सहित कई पंचायतों में ‘एक बगिया माँ के नाम’ योजना के तहत लघु कृषकों के चेहरों पर खुशी देखी जा रही है।
फलोद्यान से बढ़ेगी आय, बदलेगी तस्वीर
इस योजना के तहत किसानों की निजी भूमि पर फलदार पौधों का रोपण किया जा रहा है। इसमें आम, अमरूद, और नींबू जैसे पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आने वाले समय में ये बगीचे किसानों के लिए स्थायी आय का स्रोत बन सकें। योजना का मुख्य उद्देश्य लघु एवं सीमांत कृषकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और क्षेत्र के हरित आवरण को बढ़ाना है।
सख्ती और सही क्रियान्वयन पर जोर
योजना की सफलता के पीछे तकनीकी अमले की सक्रियता एक बड़ा कारण है। स्थल निरीक्षण और पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तारों की फेंसिंग और उचित गड्ढों की खुदाई सुनिश्चित की जा रही है।
ग्रामीणों में उत्साह
ग्रामीणों का कहना है कि पहले उनकी जमीनें खाली पड़ी रहती थीं, लेकिन अब मनरेगा के सहयोग से उन्हें मजदूरी भी मिल रही है और भविष्य के लिए एक ‘बगिया’ भी तैयार हो रही है। अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से किए जा रहे दौरों और तकनीकी मार्गदर्शन से पौधों के जीवित रहने की दर में भी सुधार हुआ है।
“योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों तक सही तरीके से पहुँचे, इसके लिए हमें रोजाना साइट पर जाकर कार्यों की गुणवत्ता देखनी पड़ती है। हमारा प्रयास है कि शासन की मंशानुसार क्रियान्वयन का पूरी तरह पालन हो ताकि आने वाले समय में जिले के अधिक से अधिक लघु कृषक इस योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन सकें।”
आशीष कुर्वेती, उपयंत्री











