पाताल गंगा की कहानी, जनता की जुबानी, आस्था की आड़ में भ्रष्टाचार का ‘खेला’

शहडोल। बुढार जनपद पंचायत के अंतर्गत कुम्हारी आने वाली ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ‘पाताल गंगा’ के नाम पर हुए निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की ऐसी परतें खुली हैं, जिसने पंचायत राज व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लाखों का वारा-न्यारा, कागजों पर ‘रिवाइज’ और जेबों में ‘माल’

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जून 2025 में 15वें वित्त आयोग की राशि से लगभग 5 लाख रुपये की लागत से पाताल गंगा में निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन भ्रष्टाचार की भूख यहीं शांत नहीं हुई। महज 5 महीने बाद, इंजीनियर और सचिव अवधेश शर्मा की जुगलबंदी ने ‘रिवाइज’ के नाम पर 2 लाख 82 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि का आहरण कर लिया।

जनता का आरोप है कि रिकॉर्ड में जहाँ 26 क्विंटल का आरोप है कि उपयोग दर्शाया गया है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि निष्पक्ष जांच होने पर वहां 26 किलो सरिया मिलना भी मुश्किल है।

धर्म की आड़ और ‘बलि का बकरा’

जब जनता ने इस धांधली का विरोध शुरू किया, तो मामले को दबाने के लिए ‘धर्म’ का सहारा लिया गया। आनन-फानन में मंदिर की बाउंड्री वॉल बनाने का शिगूफा छोड़ा गया। गड्ढे खोदे गए और साजिश के तहत 40 हजार रुपये का निर्माण माल भी उठवा लिया गया।

हैरानी की बात यह है कि विरोध बढ़ने पर सचिव और सरपंच ने पैंतरा बदला और सारा ठीकरा रोजगार सहायक पर फोड़ दिया। चर्चा है कि खुद को बचाने के लिए सचिव ने रोजगार सहायक को ‘मोहरा’ बनाकर उच्च अधिकारियों से उसकी शिकायत कर दी, जिसके बाद अब 3 सदस्यीय जांच टीम गठित हो गई है।

‘गिरगिट’ सी फितरत और तथाकथित रसूख

स्थानीय गलियारों में चर्चा है कि उक्त सचिव खुद को ‘बहु-प्रशिक्षित डॉक्टर’, ‘समाजसेवी’ और ‘तथाकथित पत्रकार’ बताकर अपना रौब झाड़ता है। अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी के भी सामने झुक जाना या उलझ जाना इसकी पुरानी फितरत रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या जांच टीम इस ‘सफेदपोश’ भ्रष्टाचार की तह तक जा पाएगी या फिर एक बार फिर छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बनाकर बड़े खिलाड़ी बच निकलेंगे?

सुभाष गौतम
Author: सुभाष गौतम

जनहित के लिए बुलंद आवाज

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें